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यह बात कहाँ खत्म होगी …

मेरे प्यारे विश्व वासियों ..
(वसुधैव कुटुम्बकम के ज़माने में सिर्फ ” देशवासियों ” कहना उचित नहीं लगता )
मैं कल ,यानि 25 दिसम्बर को सुबह सुबह ही आपको क्रिसमस की बधाई देना चाहती थी लेकिन कुछ मूड उखड़ गया .
हुआ यूँ कि मेरे मोबाइल पर क्रिसमस के कई सारे बधाई संदेश आये . फिर मैं ने उन्ही संदेशों को घुमा फिरा कर “इसकी टोपी उसके सर ” की तर्ज पर मोबाइल की कांटेक्ट लिस्ट के और लोगों को भी संदेश भेज डाले . ज़ाहिर है कि बधाई संदेश उन्ही को भेजे जाते हैं जो या तो आपके अपने सगे संबंधी होते हैं या फिर आप जिनको अच्छा इन्सान समझते हैं .
ऐसे ही एक अच्छे इन्सान हैं जो बी टेक , एम टेक कर चुके हैं और तकनीकी क्षेत्र में ही काफी नामचीन संस्था से पी एच डी कर रहे हैं . उनका उत्तर आया ……

” ना तो भेजने वाला इसाई
ना पाने वाला इसाई
समझ नहीं आया फिर किस बात की
क्रिसमस की बधाई
क्या इसी तरह नहीं हो रही
हिन्दू धर्म की विदायी ……???
ज़रा सोचिये —😑”

थोड़ी देर के लिए मैं सोच में पड़ गयी कि इनका क्या करूँ . फिर मन नहीं माना तो मैं ने उन्हे उत्तर दिया .
आपको मैं पूरा वार्तालाप पढ़वाती हूँ… . (हालांकि उनकी अनुमति नहीं ली है पर वो पढेंगे तो खुश ही होंगे क्यूँकि मैंने कई बार उन्हे इस तरह की बातें करते खुले आम सुना भी है .)

मैं – क्यूँ भाई , आखिर जीसस क्राइस्ट एक अच्छे इन्सान थे और मानवता की सेवा करते करते शहीद हो गए . उनकी जयंती पर खुश हो लेने से कोई इसाई कैसे हो गया ? अंबेदकर जयंती की छुट्टी में घर बैठने से कोई चमार तो नहीं हो जाता ?
वह – यही तो सोच बदलना है .
हमारे पास हजारो ऋषि मुनि पैदा हुए जिनके सामने जीसस का कोई औकात नहीं है .
यह क्रिश्चियन महान कब से हो गए .
मैं – इतना डिसक्रिमिनेशन मैं नहीं मानती . महान होने के लिए हिन्दू होना अनिवार्य तो नहीं होता .ऐसा होता तो कोई हिन्दू अपराधी कैसे हो जाता है . जिसका मन शुद्ध वही महान .
वह – हिन्दू होना अनिवार्य नहीं यह सही है लेकिन ये क्रिश्चियन कौन से दूध के धुले हैं .
मैं – क्लास की नहीं इनडिवीजुअल की बात करिये . सिर्फ जीसस की .
वह – क्या क्लास था जीसस का . मुझे तो कोई क्लास नजर नहीं आता .
मैं – किताब पढ़िये मैं क्या बताऊँ . मैं ने भी किताब में ही पढ़ा है .
हिस्ट्री पढ़ियेगा . बाईबल पढ़ने को नहीं कह रही हूँ .
वह –पढ़ा हूँ . बाईबल भी और कुरान भी .
कोई क्लास नहीं है दोनों का .उससे बढ़िया तो पंचतंत्र की कहानी ज्यादा ग्यान दे देती है .
मैं – क्यों पढ़े ? 😀कहीं इसी तरह तो नहीं हो रही गीता की विदायी 😂😂
चमत्कार और पशु पक्षी की कहानियाँ तो हमारे ग्रंथों में नहीं है क्या ?
अब जाने दीजिये . यह क्या फालतू की बात ले बैठे .
वह – एक बुक भेजता हूँ . रंगीला रसूल . उसको पढ़िये सारा मोह खत्म हो जायेगा .
मैं – फिर तो इन्द्र देवता का रंगीला रुप भी पढ़ना पड़ेगा . परायी स्त्री पर और बहन तक पर मोहित हो जाने वाले देवताओं के किस्सों से पुराण भी भरे पड़े हैं .
वह – फालतू बात नहीं है .यही सोच कर हम लोग छोड़ देते हैं जिसके कारण हजारों साल तक गुलामी झेलना पड़ा .अब तो जागरुक हो जायें .
हिन्दू धर्म में इन्द्र एकलौता भगवान थोड़े है . यह तो ऐसे ही लोगों द्वारा लिखा गया है . तभी तो इन्द्र को कोई नहीं पूजता .
मैं – मेरे ख्याल से तो जो जितना लम्बा टीका लगा कर हिन्दू या धार्मिक  होने का ढोल पीटते हैं वो उतने बड़े पाखण्डी होते हैं . एक ना एक दिन जब पकड़े जाते हैं तो असलियत सामने आती है .
वह – मैं टीका नहीं लगाता ना ही इसका समर्थन करता हूँ .
मैं – आपको कह ही कौन रहा है 😁
जीसस भी क्रिश्चियन नहीं थे . उनकी हत्या के बाद लोगों ने इसाई धर्म चला दिया तो वो बेचारे क्या करें. सच्चे लोग किसी को जबर्दस्ती फॉलोवर नहीं बनाते . हमें उनके सच्चे काम से मतलब है ना कि उनके धर्म से . ऐसे तो असाराम , राम रहीम , राधे माँ ने भी हिन्दू धर्म का क्या नाम रोशन कर दिया .

  • वह – जीसस हों या मुहम्मद . दोनो के जीवन के दस साल का पता नहीं है कि वे कहाँ थे .विवेकानन्द के अनुसार वे भारत में हिमालय में साधु जीवन के रहस्य की शिक्षा ले रहे थे .
    मैं – तब तो भारत में नहीं , पक्का नेपाल में होंगे . 😁 लेकिन क्या उनके परोपकारी जीवन को किनारे कर उनसे घृणा करने का यह कारण है कि वो हिमालय में रहे ?
    वह – पापी तो हर युग में होते हैं . असाराम बापू तो सेक्स स्कैंडल में फंसा . लेकिन शायद आपको पता नहीं है कि वो धर्मान्तरण का बहुत बड़ा विरोधी था इसीलिये उसके खिलाफ वेटिकन सिटी से षड्यंत्र हुआ .
    मैं – जब पापियों को धर्म से नहीं जोड़ सकते तो मानवता की सेवा करने वालों को किसी खास धर्म से जोड़े जाना कहाँ सही है .
    वह – अच्छा हैप्पी बर्थडे जीसस भाई . भगवान महादेव का आशीर्वाद सदैव बना रहे .

मैं ने सोचा कहूँ कि हाँ हिमालय पर्वत पर दोनों की मुलाकात भी हुई होगी , लेकिन 😀😀ऐसा स्माइली बना कर बात खत्म कर दी .
लेकिन अभी तक सोच में हूँ कि यह बात आखिर कहाँ जाकर खत्म होगी ….

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Comments (2)

  1. पढ़-लिखकर भी खो दिया सब, इतना दिमाग इन सब बातों में लगाते हैं पीएचडी टाइम पर पूरी कर लेंगें संशय हो रहा है .. 😀

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