हिन्दी कविता

:- आह्वान गीत :-

 

:- आह्वान गीत :-

तुम जो कहते थे ये भी वही कहते है ,
शासक बदलते रहे दर्द एक से रहते है l
जुबा से सब पौरुष का बखान करते है ,
पर सीमा पर हर दिन जवान मरते है ll
आओ सीमा से सियासत अलग करते है ,
मिलकर एक बार प्रबल प्रहार करते है l
क्या भगवा क्या हरा सब छोड़ते है ,
आओ मिलकर वन्दे मातरम करते है ll
आओ फिर शिव का आवाहन करते है,
नटराज सा ही रौद्र रूप फिर धरते है l
यू तो मरना जीना लगा रहेगा उम्र भर ,
आओ एक बार वतन पर फिर मरते है ll
छीटाकसी की शरारत सब बंद हो जाये ,
मेरी चाहत है सियासत अब मर्द हो जाये l
जिये तो जिए हम वतन के खातिर ,
ये तुक्ष जीवन भी मकरंद हो जाये ll
अपने पीछे वो अपना परिवार छोड़ गया है ,
अंतिम नमन करते करते तिरंगा ओढ़ गया है l
आँधियो के बीच खड़ा रहा वो डट कर ,
जाते जाते वो हवाओं का रूख मोड़ गया है ll
आओ हम सब इस तिरंगे का मान करते है ,
हर मजहब से पहले हिंदुस्तान करते है l
नतमस्तक हो शहीदों को प्रणाम करते है ,
पूजा और इबादत वतन के नाम करते है ll

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  1. सुन्दर भावनाओं के साथ रचा गया सुन्दर गीत. आशा करते हैं कि इसकी एक एक लाइन जन जन तक पहुंचे और भारत में केवल भारतवासियों का ही वास हो.

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