Sinserasaysहिन्दी कविता

वंदना

या कुन्देंदु तुषारहार धवला यह कैसा समय है आया ,
हंसा नाम धरा कर कव्वा कैसा स्वांग बना कर आया ,
नभ जल थल अवनि अम्बर तल विकल सकल संसार हुआ है ,
तेरे कर की पुस्तक का अब कोई न गुणग्राह बचा है ,
स्वार्थ मनोरथ सिद्धि ही अब हैं तेरे साधक के साधन ,
नहीं धार तलवार लेखनी दोनाली बन्दूक हुआ है ,
हंसवाहिनी कैसे कर लेती हो सुख साधन वीणावादन,
शुभ्र वसन वर दंड कमंडल पीत वरण और पंक भरा है ,
आयुध है तेरे कांधे और लक्ष्मी का आखेट हैं करते ,
यही एक मंतव्य शारदे तेरे साधक के हृदय है ,
छद्म ग्यान छल कलुष मिटा दो मिटा सको पाखण्ड मिटा दो ,
अल्पग्यान अग्यान मिटा कर जग में ग्यान प्रकाशित कर दो ,
प्रिय स्वतंत्र रव अमृत मंत्ररव चिर अनंत ब्रह्मांड में भर दो,
वीणावादिनी विद्या ग्यान दान प्रदान कर जगमग जग कर दो .

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