:- चलते रहना :-

I जब तुम्हारा मन व्यर्थ विकल हो , राह में कठिनाईयों का दखल हो l हो संकल्पित तुम दृढ करना मन को , निर्बल न मान भले मुश्किलें सबल हो ll डर कर यू हार तुम मंजुर नहीं करना , रुकावटें हजार आएँगी तुम नहीं ड

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:- अमर प्रेम :-

कुछ न कहूंगा , मैं दर्द सहूंगा l जाना है तो जाओ , मैं तेरा ही रहूँगा l इतना दूर भी न जाना , हो सके तो लौट आना l मेरे खाबो ख्यालो में , एक आशियाना बनाना ll दीवाना था दीवाना रहूंगा , सारी उमर तेरा राह तकू

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:- आह्वान गीत :-

  :- आह्वान गीत :- तुम जो कहते थे ये भी वही कहते है , शासक बदलते रहे दर्द एक से रहते है l जुबा से सब पौरुष का बखान करते है , पर सीमा पर हर दिन जवान मरते है ll आओ सीमा से सियासत अलग करते है , मिलकर एक बार

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:- मेरी भावनायें :-

  लिखने से पहले जंग की तैयारी कर ली है, अपने हर लफ्ज में बारूद भर ली है l मेरे जख्मो दर्द का इल्म नहीं है मुझको , अपनी पीर तो रब के हवाले कर दी है ll मेरे रास्ते बहुत कठिन है , पर मुझे खुद पर यकीन है

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